Saturday, April 12, 2008

और इस बहाने बेटी को जायदाद से बेदखल किया जाता है....

शादी या तमाशा पर स्वप्नदर्शी जी का कमेंट एक सबसे ज़रूरी बात जो इस पोस्ट में छिपी थी उसे उठा रहा है .....बाकी सब ने यहाँ वहाँ की हर बात कह दी ,किट्टी पार्टी वाली औरतों की धिक्कार से लेकर न जाने क्या क्या ......क्या गहराई मे छिपी इस बात की ओर ध्यान गया किसी का ....कंटेंट विश्लेषण की बजाय हम सब को व्यक्ति विश्लेषण की आदत जो है .।

पढिये इसे ...यह वाकई विचारणीय है .....

खैर आज से नही, जब से होश सम्भाला है, मेने किसी ऐसी शादी मे शिरकत नही की, जो धूम-धाम वाली, दहेज वाली हो.
मेरा हमेशा से आग्रह रहा है कि शादी दो तीन धंटे मे दिन के समय हो जानी चाहिये और बहुत मामूली खर्च के साथ, पर फिर भी तनावमुक्त और मज़े के लिये जगह होनी चाहिये.

अपनी शादी मे मुझे और मेरे पति को इस ढंग़ से करने के लिये, अपने परिवार जनो को एक साल तक समझाना पडा.

अन्तत: हमारी एक रविवार को, दोपहर 12-3 के बीच शादी हुयी, और सिर्फ 12 दोस्त, और एक जज के सामने. दोस्तो पर कुछ न कुछ खाना बना कर लाने का भार था. और हिन्दुस्तानी थीम की पौशाक पहनने का.

पिछ्ले साल भाई की शादी के लिये पिताजी ने हलवाई, पंडाल आदि का इंतेज़ाम किया था, पर मेरे भाई ने सब कैंसिल करवा दिया. सो घर मे जितने यार-दोस्त, नाते-रिश्तेदार आये सब ने मिलकर 100 लोगों का खाना बनाया, और इतना अच्छा कि शायद ही किसी बारात मे मिले.
उसके साथ्, रात भर गाना-बजाना चलता रहा, और 5-70 साल वाले सभी लोगों ने धमाल किया.

कम से कम दस बार हाथ जोड्कर भाभी के पिता को समझाना पडा कि वो कुछ न दे, हमारे घर मे रखने की जगह नही है. पर किसी किस्म की कमी भी नही है.

ये सभी चीज़े हो सकती है,

सिर्फ वर-पक्ष पर दोष ठीक नही है, वधू के पिता को भी अपनी समाजिक साख बनाने की बहुत उतावला पन होता है.

दूसरा पक्ष ये भी है, कि दिखावे की शादी करने के बाद, बेटी का बाप, अपने अपराधो का सामाजिक प्रायश्चित करता है. उन पापो का, जो उसने अपनी बेटी के पालान मे दोगलेपन का किया. और इस बहाने अपनी जायदाद के बडे हिस्से से बेटी को बेदखल करता है.

8 comments:

दिनेशराय द्विवेदी said...

स्वप्नदर्शी जी की बात सही है। शादी से पुत्री के हक की पिता की जायदाद में से बेदखली परंपरागत रुप से होती है। लेकिन आज स्थिति भिन्न है। यह बेदखली कानूनन तो संभव नहीं है। क्यों कि इस का कानूनी अधिकार पुत्री को मिल गया है। यह जरुर है कि इस रीति से पुत्री पर इतना मानसिक बोझा आ जाता है कि वह खुद ब खुद ही खुद को बेदखल समझने लगती है।
लेकिन यह स्थिति वहीं है, जहाँ परिवारों में बाँटने लायक संपत्ति है। जहाँ बेटी को ब्याहने के लिए कर्जा लेना पड़ता है जिसे चुकाने में जीवन गुजर जाता है, वहाँ की बात कीजिए।
मेरी मान्यता में विवाह पारिवारिक मामला है। खाना-आबादी है, इसे वहीं तक सीमित रखना चाहिए। खर्चीली और दिखावा करने वाले विवाहों का समाजिक असर खतरनाक है, और सभी धर्मों व जातियों में व देशव्यापी है। इस कारण से यह अपराधिक भी है। इस दिखावे और खर्चे पर कानूनी पाबंदी होने के लिए सख्त अपराधिक कानून बनाए जाने के लिए आंदोलन निर्मित होना चाहिए।

Anonymous said...

hum aapse bilkul aur bahut hi sehmat hai,shadi do dil aur do parivar ka milan hai,thodi se paison mein,thode se log aur thodi masti khushnuma mahol mein shaadi honi chahiye,jo paise dhumdham pe karch karnewale the wo hi,beti ya bete ke naam jama kara de bank mein taki unhe kabhi kaam aa sake,magar aaj kal to har shaks kamata hai,apne mata pita se kuch na le yahi sahi hai,khair ye to halat par nirbhar karta hai,magar chotisi shaadi sab jagah ho to kitna achha hoga.

Unknown said...

दिखावे की शादी करने के बाद, बेटी का बाप, अपने अपराधो का सामाजिक प्रायश्चित करता है. उन पापो का, जो उसने अपनी बेटी के पालान मे दोगलेपन का किया. और इस बहाने अपनी जायदाद के बडे हिस्से से बेटी को बेदखल करता है.
एकदम सहमत हूं आपसे...

Arun Arora said...

एक सच ये भी है पैसे के लिये संबंधो मे ज्यादा नीचता वही दिखाते है जिनकी अंटी मे इतने पैसे होते है कि जिस पैसे के लिये वो नीचता दिखा रहे है उसका उनके लिये कोई वकत नही होती कई गुने पैसे वो वैसे ही उडा डालते है अपनी झूठी शानो शौकत दिखाने के लिये

Unknown said...

bahut achha

rakhshanda said...

beti ki shaadi par bekar ka dikhava karne achha hai agar parents vahi paisa uski education par laga den,lekin pata nahi zyadatar log aisa nahi sochte...

Unknown said...

यह भी एक सोच है कि बाप इस तरह बेटी को जायदाद से बेदखल कर देता है. पर अब नए कानून मैं बेटी को बेदखल करना बाप के लिए शायद सम्भव नहीं होगा. लेकिन यहाँ यह भी अपेक्षित है की बेटी बाप को सिर्फ़ जायदाद के लिए ही याद न करे.

Unknown said...

Jisne bhaag kar shaadi ki ho Apne baap Ko jeete ji maar diya kiya guzar ti hogi oos baap per jisne Bohot badhe sapne dekhe Ho beti ke haq Mai Aur woh ladki Apne he baap ki IZZAT CHHIN Le kesa lagta hoga baap Ko jaise beech SADAK per kapdhe ootaar diya ho Roz marta hai EK GALTI kare koi Roz marey baap waaaaaaaah !!!!!!!!!!!!!

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