Friday, October 2, 2009

"Lilavati's Daughters: The Women Scientists of India"

इंडियन अकेडमी ऑफ़ सायंस ने सिलसिलेवार तरीके से पिछली तीन पीढीयों की महिला वैज्ञानिकों के जीवन अनुभवों पर आधारित एक संकलन तैयार किया है "Lilavati's Daughters: The Women Scientists of India".

गुजर गयी
पीढी के बारे मे कई जाने-माने वैज्ञानिकों ने लिखा है, और जो अभी सेवामुक्त और सेवा मे लगे है, उन्होंने अपने अनुभवों को समेटा है. कई तरह के सवाल जहन मे है, और कई लोगो से सीधा-तिरछा सामना भी रहा है, इन पर फ़िर कभी। फिलहाल कुछ अनुभव अतिरेक के साथ भी पढने मे रुचिकर है...

5 comments:

Arvind Mishra said...

क्या आपको ऐसा नहीं लगा की शीर्षक कुछ अटपटा सा है - क्या "Lilavati's successors' : The Women Scientists of India" हो सकता था ?

स्वप्नदर्शी said...
This comment has been removed by the author.
स्वप्नदर्शी said...

@Arvind Mishra,

Title is appropriate. Daughters have a deep rooted and shared sense of agony and struggle with mothers. Successor only inherits the property and not the pain.

If these women scientists have addressed the social-political changes that took place in past centuries and hurdles that are still ahead, it could have been an added value to the book and for the future generation. Many of the acclaimed women scientists are silent and have denied gender descrimination. Which in my opinion is due to their pro-establishment approach.

सुजाता said...

बहुत आभार स्वप्नदर्शी जी। मै अक्सर सोचा करती थी कि जब वैज्ञानिकों की बात चलती है तो उसमे स्त्री चेहरे न के बराबर क्यों दिखाई देते हैं।ज्ञान , विज्ञान इतिहास की हर शाखा का आधा इतिहास लिखा जाना अभी बाकी है।कहना होगा कि कुछ चीज़ों को बखूबी नज़र अन्दाज़ किया गया है।
आभार !

Meenu Khare said...

बहुत आभार स्वप्नदर्शी जी।