Saturday, January 7, 2012

उन्नीसवीं बीवी : बहुविवाह के दलदल मे फँसी एक स्त्री का दस्तावेज़


तीन साल पहले,अंतर्जाल पर भटकते -भटकते जिस किताब के बारे मे मुझे पता चला जो स्त्री-विमर्शकारों के लिए बहुत महत्वपूर्ण साबित हो सकती है , या यह मेरा ही अज्ञान हो कि अब तक्मुझे इसके विषय मे नही मालूम था।जो भी हो बहुविवाह पर बात शुरु हो तो एन्न. एलिज़ा यंग की पुस्तक उन्नीसवीं बीवी निश्चय ही महत्वपूर्ण साबित होगी।
Wife no.19 केवल इसलिए महत्वपूर्ण नही है कि यह बहुविवाह की व्यवस्था मे स्त्री की दुर्दशा और पीड़ा को बयान करती है बल्कि इसलिए कि यह धर्म से,चर्च से सीधी टकराहट है। Mormonism धर्म मे प्रचलित बहुविवाह धार्मिक रिवाज़ ही था और एन्न.एलिज़ा जिस पुरुष की 56 पत्नियों मे से एक थी वह और कोई नही मोर्मोनिस्म का उनीसवीं सदी का सबसे बड़ा नेता था और मोर्मोन चर्च या जिसे औपचारिक रूप से The Church of Jesus Christ of Latter Day Saintsकहा जाता था का प्रेसिडेंट भी था।वर्षों तक इस धार्मिक प्रथा मे सड़ने के बाद एलिज़ा न केवल भागने मे सफल हुई बल्कि सब कुछ लिख कर इतिहास मे दर्ज करने मे भी सफल हुई जिसे Salt Lake City, Utah , United States की स्त्रियाँ बरसों से सह रही थीं।
उन्नीसवीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध मे जब मोर्मोंस कट्टरपंथियों और अमेरिका की सरकार के बीच युद्ध आरम्भ हुआ तो सरकार ने बहुविवाह का विरोध किया। बहुविवाह तो बीसवीं शताब्दी के आरम्भ तक समाप्त हो गया लेकिन मोर्मोनिस्म अपनी कट्टरता के साथ आज भी एक जीवित धर्म है।इसके प्रमाण मिलना मेरे लिए बेहद दिलचस्प था। अंतर्जाल की सहायता से मुझे एक ऐसे मोर्मोन का ब्लॉग मिला जो अपने धर्म को छोड़ तो चुका है लेकिन इसके लिए वह अपने मित्रों,सम्बन्धियों और परिवार से बहिष्कृत हो चुका है।इन्हीं के ब्लॉग से मुझे उन्नीसवीं बीवी की याद आई और मैने इस सब को खंगालना शुरु किया। mormon411 के नाम से लिखने वाले ये महाशय कहते हैं-
Why would a person leave the church, knowing in advance what is most likely going to happen? For each person it is different. But to most, the threat of losing family, friends, home, job, and reputation is a worthy price to pay for intellecual freedom, self integrity, and "the truth".
इनकी प्रोफाइल में लिखा है -
I blog with three purposes. First is to show others who may be doubting or feeling suppressed that you are not alone. Second, to show the LDS people that the church is not perfect. If they choose to continue believing, at least they will have made a more informed decision. Third, is just to say what's on my mind and get it out. Sometimes I'm angry about being lied to;
साफ है कि आज के समय मे भी यह एक पुरुष के लिए कितना त्रासद और कठिन् है कि वह जिस धर्म मे पला -बढा उसे और उसे मानने वाले अपने परिवार को अपनी वैचारिक आज़ादी को पाने की कीमत पर त्याग दे।ऐसे मे एन्न एलिज़ा यंग मुझे एक क्रांतिकारी,विद्रोहिणी ही प्रतीत होती है जिसने 1875 में अपनी आत्मकथा मे न केवल मोर्मोनिस्म की कड़ी आलोचना की बल्कि इसमे पड़ी स्त्री के दमन और पीड़ा का भी वर्णन किया। जिसे mormon411 छद्मनाम का सहारा लेकर अपने ब्लॉग मे 2011मे लिखते हैं उसे एलिज़ा 132 वर्ष पहले ही कहने का साहस कर चुकी।वे लिखती हैं-
a desire to impress upon the world what Mormonism really is; to show the pitiable condition of its women, held in a system of bondage that is more cruel than African slavery ever was, since it claims to hold body and soul alike.
धर्म से सीधी टक्कर लेकर वह निरापद तो नही रही होगी।उसे झूठा और अविश्वसनीय साबित करने की चर्च ने जीतोड़ कोशिशें कीं।गनीमत ही थी कि डायन कह कह पत्थर मार-मार कर उस आँख की किरकिरी को निकाल बाहर नही किया। Utah का इतिहास देखने से इसका कुछ कारण समझा जा सकता है।1857-58 तक United States Of America में Utah को मिलाया जा चुका था और अमेरिकी सरकार अपने नियम कानून यहाँ ला रही थी। अब यह पूर्णत: चर्च-शासित राज्य नही रहा था।
अपनी आत्मकथा की शुरुआत मे ही एलिज़ा मोर्मोनिस्म मे फँसी दमित स्त्रियों को बाहर निकलने का साहस देती हैं,उनका आह्वान करती हैं|इस विद्रोहिणी को मेरा सलाम !

Sunday, January 1, 2012

हो नववर्ष मंगलमय


नया वर्ष आ गया; वर्ष 2012 आ गया; पुराना वर्ष 2011 चला गया। इस समय समाचारों में लोगों का उत्साह दिखाया जा रहा है। घर के कमरे में बैठे-बैठे हमें यहां उरई में खुशी में फोड़े जा रहे पटाखों का शोर सुनाई दे रहा है। लोगों की खुशी को कम नहीं करना चाहते, हमारे कम करने से होगी भी नहीं।

कई सवाल बहुत पहले से हमारे मन में नये वर्ष के आने पर, लोगों के अति-उत्साह को देखकर उठते थे कि इतनी खुशी, उल्लास किसलिए? पटाखों का फोड़ना किसलिए? रात-रात भर पार्टियों का आयोजन और हजारों-लाखों रुपयों की बर्बादी किसलिए? कहीं इस कारण से तो नहीं कि इस वर्ष हम आतंकवाद की चपेट में नहीं आये? कहीं इस कारण तो नहीं कि हम किसी दुर्घटना के शिकार नहीं हुए? कहीं इस कारण तो नहीं कि हमें पूरे वर्ष सम्पन्नता, सुख मिलता रहा?

इसके बाद भी नववर्ष के आने से यह एहसास हो रहा है कि बुरे दिन वर्ष 2011 के साथ चले गये हैं और नववर्ष अपने साथ बहुत कुछ नया लेकर ही आयेगा। देशवासियों को सुख-समृद्धि-सफलता-सुरक्षा आदि-आदि सब कुछ मिले। संसाधनों की उपलब्धता रहे, आवश्यकताओं की पूर्ति होती रहे।

कामना यह भी है कि इस वर्ष में बच्चियां अजन्मी न रहें; कामना यह भी है कि महिलाओं को खौफ के साये में न जीना पड़े; कामना यह भी है कैरियर के दबाव में हमारे नौनिहालों को मौत को गले लगाने को मजबूर न होना पड़े; कामना यह भी कि कृषि प्रधान देश में किसानों को आत्महत्या करने जैसे कदम न उठाने पड़ें; कामना यह भी कि भ्रष्टाचारियों की कोई नई नस्ल पैदा न होने पाये और पुरानी नस्ल का विकास न होने पाये....कितना-कितना है कामना करने के लिए....नये वर्ष के साथ होने के लिए।

आइये चन्द लम्हों के आयोजन में हजारों-लाखों रुपयों की बर्बादी कर देने के साथ-साथ इस पर भी विचार करें। इस विचार के साथ ही आप सभी को नव वर्ष की शुभकामनायें...कामना है कि आप सभी को ये वर्ष 2012 सुख-सम्पदा-सुरक्षा-सम्पन्नता-सुकून से भरा मिले।


चित्र गूगल छवियों से साभार