Sunday, March 3, 2019

जहाँ सवाल हैं रास्ते हैं जहाँ ...





चोखरबाली स्टडी सर्कल की दूसरी मीटिंग दिनाक 2 मार्च 2019 को खड्गसिंह मार्ग से आगे मस्जिद की सीढियों पर हुई. बारिश की वजह से तय जगह पर मीटिंग नहीं हो पाई| इस मीटिंग में डॉ. सुजाता, शबनम, अलका, सरिता, कन्नूप्रिया, इशिता, शालिनी, हिमाभ्री मौजूद रहीं. 

डॉ. सुजाता ने 2008 में चोखेरबाली नाम से ब्लॉग शुरू किया, जिसमें अलग-अलग परिवेश से जुड़ी स्त्रियां कविता, कहानी, लेख या आपबीती साझा करके स्वयं को अभिव्यक्त करती थीं। ब्लॉग पोस्ट और उनपर संवादों के ज़रिए स्त्रीवाद की एक थियरी इमर्ज होती थी। चोखेरबालीपर अब भी इसी तरह के पोस्ट और थियरेटिकल लेख लिखे जाते हैं। हिंदी ब्लॉगोस्फीयर में चोखेरबाली ने एक सार्थक भूमिका का निर्वाह किया। लेकिन नई चुनौती तब सामने आती है जब मौजूदा समय में सोशल मीडिया के नए माध्यमों में हम देखते हैं कि स्त्रीवाद को लेकर बहुत सी भ्रांतियां है, फेमिनिज़्म को जाने समझे बग़ैर लगभग गाली की तरह कुछ लोग इस्तेमाल कर रहे हैं, दुष्प्रचार है।इन सब पर खुलकर चर्चा करने के लिए, स्त्रीवाद समझने के लिए मूल टेक्स्ट, क्लासिक्स की तरफ जाने के लिए इस स्टडी सर्कल की शुरुआत की गई है।

पिछली बार सबके परिचय ,कुछ सवालों, जिज्ञासाओ के शमन  के साथ मीटिंग समाप्त हुई थी। चोखेरबाली की आज की मीटिंग में ऑगस्ट बेबल की किताब ' वुमन एण्ड सोशलिज्म' के चेप्टर VIII मॉर्डन मैरिज ( आधुनिक विवाह ) पर चर्चा हुई जिसे ग्रुप में पहले ही उपलब्ध करा दिया गया था। मातृ प्रणाली से हम पितृसत्ता की तरफ़ कैसे आते हैं और कैसे एकल विवाह निजी संपत्ति के लिए ज़रूरी हो जाता है इस सब पर बात हुई और फ्रेड्रिख़ एंगेल्स की किताब’परिवार, राज्य और निजी सम्पत्ति’ को पढ़ा जाना ज़रूरी है रेखांकित  गया।

पश्चिम में महिला मताधिकार आंदोलन के बारे में चर्चा हुई जिसमें भारत की सोफिया दुलीपसिंह  ने इंग्लैंड में इसमें भाग लिया। सरोजिनी नायडू और स्त्री संगठनों की भी भूमिका रही। भारतीय स्त्री को  मताधिकार बिना कुछ किए ही झोली मे नहीं मिला| स्त्रीवाद (फेमिनिज्म) क्या है ? डॉ सुजाता ने बताया कि फेमिनिज्म एक राजनीतिक स्टैंड है| बातचीत में कई तरह के सवाल उठते रहे। 'क्या स्त्री का महावारी राजनीतिक मुद्दा है'?इसपर विस्तार से बात हुई जिसमें सबरीमाला मंदिर का विवाद और "हैप्पी टू ब्लीड" पर भी बात हुई।बेशक, यह भी राजनीतिक है क्योंकि यह साधनों की उपलब्धता, कीमत और सामाजिक मान्यताओं से जुड़ता है।

रेडिकल फेमिनिज्म शब्द को लेकर भी चर्चा हुई. रेडिकल शब्द का अर्थ 'उग्र' / मिलिटेंट जैसा निकालते हैं लेकिन इसका अर्थ  है ' जड़ से निकालना' यानि पितृसत्तात्मक व्यवस्था की जड़ो को खत्म करना। 

कई सारे सवाल ज़हन में अभी भी कुलबुला रहे थे लेकिन मीटिंग ख़त्म करने का वक़्त हो गया था। बहुत ही बेहतरीन बातचीत, स्त्रीवादी विमर्श से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर एक सफल मीटिंग सम्पन्न हुई। अगली बार 10 मार्च को मिलना तय हुआ, यह भी तय हुआ कि अनुशासन का पालन किया जाएगा लेकिन जड़ नियमों से इस ग्रुप को नीरस और बोझिल नहीं बनाया जाएगा। ग्रुप के सदस्यों की संख्या लगभग निश्चित सी हो जाए तो आगे के कार्यक्रमों की भी योजना बनाई जाएगी।


-- अलका जिलोया