Saturday, September 13, 2008

उङान - ०१

११- सितम्बर -२००८ सायं ६:३०, इंडिया हैबीटैट सेंटर का "स्टाइन सभागार" दर्शकों कि भीङ से भर चुका है आज वहाँ सभी जयजयवंती वार्षिकोत्सव मनाने को एकत्रित हुये हैं और खास बात यह भी है कि वहाँ "अनुभूति" "अभिव्यक्ति" कि संपादिका सुश्री पूर्णिमा वर्मन जी को "जयजयवंती सम्मान" से सम्मनित किया जायेगा शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति हो जो इंटरनेट हिन्दी से जुङा हो और उन्हें ना जानता हो, अगर मैं उन्हें इंटरनेट पर हिन्दी कि जननी कहूँ तो इसमें कोई दो राय नहीं. आज हज़ारों कि संख्या में ब्लाग्स हैं संकङो कि संख्या में हिन्दी वेबसाइटस हैं. उनपर कोई अपने लिये काम कर रहा है, कोई प्रसिद्धी पाने के लिये तो कोई तानाकशी के लिये. निष्पक्ष भावना से सिर्फ हिन्दी के लिये काम करने वालों में पूर्णिमा जी का नाम सर्वोपरि है.

ये समस्त स्त्री वर्ग और साहित्य से जुङे लोगों के लिये अत्यंत गौरव की बात है. पूर्णिमा जी बहुत सरल और बहुमुखी प्रतिभा वालीं व्यक्तितव हैं. उनसे मिलना, बातें करना, उनके काम करने कि शैली, उनकी लगन और हिंदी के लिये उनका प्रेम सभी कुछ प्रेरित करता है हिन्दी के लिये कुछ करने के लिये.

पूर्णिमा जी ने अपने छोटे से वक्तव्य में कहा हिन्दीं कई जगहों पर अभी भी बहुत पीछे हैं, जैसे यदि विकीपीडिया में सभी रोज़ कुछ ना कुछ डालें तो भी हम हिन्दी को बेहतरी के ओर ला सकते हैं. हिन्दी से कैसे ज्यादा से ज्यादा लोग जुङे इसके लिये उनके अथक प्रयास हमेशा अग्रसर रहते हैं। वे अपनी वेबसाईट पर कई महोत्सव कराती रहती हैं, अभी वे व्यापक ढंग से कथा महोत्सव करा रही हैं. आप सब भी उस महोत्सव में अपनी उपस्थिती दर्ज करा सकते हैं.

ये कुछ लिंक "अनुभूति" "अभिव्यक्ति" के
http://www.abhivyakti-hindi.org/
वहाँ लिये गये कुछ फोटों जल्द ही आप लोगो के साथ भी बाँटूगी।

समय बहुत बदल रहा है, खासकर स्त्रियों के लिये. आज की हर नारी एक प्रेरणा हैं मिसाल है, हमारी आने वाली अगली नस्लों के लिये. यहाँ तक का सफर स्त्री ने खुद ही तय किया है और आगे उम्मीद है कंधे से कंधा मिलाकर वो अपनी सहस्र शक्तियों से अवगत कराती रहेगी.

10 comments:

Unknown said...

कैसा दुर्भाग्य है हमारा कि हमने कभी सुश्री पूर्णिमा वर्मन जी का नाम नहीं सुना. आज आपकी कृपा से यह सौभाग्य भी प्राप्त हो गया. इस के लिए कोटिश: धन्यवाद.

@समय बहुत बदल रहा है, खासकर स्त्रियों के लिये. आज की हर नारी एक प्रेरणा हैं मिसाल है, हमारी आने वाली अगली नस्लों के लिये. यहाँ तक का सफर स्त्री ने खुद ही तय किया है और आगे उम्मीद है कंधे से कंधा मिलाकर वो अपनी सहस्र शक्तियों से अवगत कराती रहेगी.

यह सही है कि समय बहुत बदल रहा है. यह भी सही है कि खासकर कुछ स्त्रियों के लिये समय बहुत बदल रहा है. पर यह कहना कि 'आज की हर नारी एक प्रेरणा हैं मिसाल है' सही नहीं है. बहुत अच्छा लगेगा अगर यह कुछ नारियां पूरे नारी वर्ग का प्रतिनिधित्व करें. पर अधिकाँश नारियों के लिए समय अभी नहीं बदला है. यह सफर वह नारियां ख़ुद नहीं तय कर पाएंगी. उन्हें जरूरत है सहायता की उन नारियों से जिन्हें हर नारी की प्रेरणा या मिसाल कहा जा रहा है.

Renu said...

I dont know ,how to post a comment in Hindi, on this blog, if somebody can help me, pl tell me.
I am ashamed to say that i didnt know Ms.Poornima Burman, but now I feel honored to know.
Yes times are changing and changing for better,and we must support all the good that is coming out of this change

अनूप भार्गव said...

पूर्णिमा जी को दिया जाने वाला सम्मान उन के लिये सम्मान नहीं है बल्कि उस सम्मान के लिये सम्मान की बात है ।

उन का हिन्दी गद्य और पद्य दोनों को इंटरनेट के द्वारा जन जन तक पहुँचाने का कार्य वंदनीय है ।
इस कार्यक्रम के बारे में जानकारी के लिये धन्यवाद । चित्रों का इंतज़ार रहेगा ।

अनूप भार्गव said...

रेणु जी के प्रश्न ",how to post a comment in Hindi" के ज़वाब में:
वैसे तो कई तरीके हैं लेकिन शायद सब से सरल और जिस में किसी भी software को स्थापित करने की ज़रूरत नहीं होती :
http://www.google.com/transliterate/indic/
सहायता के लिये :
http://www.google.com/transliterate/indic/about_hi.html

Anonymous said...

पूर्णिमा जी को बधाई। वे ठीक कहती हैं कि 'यदि विकीपीडिया में सभी रोज़ कुछ ना कुछ डालें तो भी हम हिन्दी को बेहतरी के ओर ला सकते हैं'।

debashish said...

पूर्णिमा जी को बधाई! विकीपीडिया पर उनका योगदान काबिले तारीफ है।

अविनाश वाचस्पति said...

जयजयवंती सम्‍मान की रिपोर्ट तैयार की होगी उसे हिन्‍दी मीडिया में प्रकाशन के लिए भिजवाने का कष्‍ट करें संगीता जी। अविनाश वाचस्‍पति

अविनाश वाचस्पति said...

या मेरी मेल में भेजें avinashvachaspati@gmail.com

Renu said...

Thank u Anoop ji, I will see if i can do it.

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` said...

Purnima ji ( Pearl ) ko mere Abhinandan !

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